उत्तराखंड: करोड़ों में पहुंचा राजधानी में नशे का काला कारोबार

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उत्तराखंड की राजधानी देहरादून किस कदर नशे के सौदागरों की गिरफ्त में आ चुकी है, ये साबित करने के लिए बस इतना समझना काफी होगा कि पिछले साल तक लाखों में रहने वाला नशे का कारोबार इस साल करोड़ों के आंकड़े तक पहुंच गया है. दून पुलिस की नारकोटिक्स वर्कशॉप में ये आंकड़े सामने आए हैं. राजधानी में लगातार बढ़ते नशे के मामलों ने दून पुलिस की परेशानियां बढ़ा दी हैं.

देहरादून पुलिस लाइन में दून पुलिस ने नशे के खिलाफ किये इस साल की कार्रवाई का लेखाजोखा पेश किया. नारकोटिक्स सेल और पुलिस ने जो आंकड़े पेश किए उसने पुलिस को ही सवालों के घेरे में ला खड़ा कर दिया है. जिन आंकड़ों को पुलिस उपलब्धि के तौर पर पेश कर रही थी, उसने ही पुलिस के दावों की पोल खोलने का काम किया है. नारकोटिक्स वर्कशॉप में पुलिस ने बताया कि साल 2015 में 63 लाख की अपेक्षा पुलिस ने इस साल अब तक 2 करोड़ से ज्यादा के मादक पदार्थ पकड़े हैं. साथ ही करीब 278 लोगों को सलाखों के पीछे पहुंचाया है. लेकिन, यही आंकड़े बता रहे है कि साल 2015 की अपेक्षा इस साल राजधानी में नशे के कारोबार में दोगुने से भी ज्यादा का इजाफा हुआ है.

क्या कहते है पुलिस के आंकड़े?
नारकोटिक्स वर्कशॉप से मिले आंकड़ों की मानें, तो साल 2015 में दून पुलिस ने 63 लाख 7 हजार और 845 रुपये के मादक पदार्थों की बरामदगी के साथ तस्करी और बिक्री करने वाले 136 लोगों की गिरफ़्तारी हुई. इस साल दून पुलिस ने अभी तक महज 9 महीनों में ही 2 करोड़, 13 लाख, 26 हजार 619 रुपये के मादक पदार्थों की बरामदगी कर बिक्री और तस्करी में लिप्त 278 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है. नारकोटिक्स पदार्थों की बरामदगी के मामले में राज्य के अन्य 12 जिलों और जीआरपी थानों की गई कुल बरामदगी से ज्यादा बरामदगी अकेले देहरादून पुलिस ने की है.

सिर्फ मोहरों की गिरफ्तारी क्यों?
पुलिस जिन 250 से अधिक लोगों की गिरफ्तारी का दावा कर रही है, उनमें से भी ज्यादातर दून के ही युवा या छात्र हैं, जो नशे के सौदागरों के मोहरे बने हुए हैं. कई तो ऐसे भी हैं जो कई बार जेल जा चुके है, लेकिन पुलिस फिर भी उनसे सौदागरों का पता नहीं पूछ पाई. यहां बात अब पुलिस के कामों को उसके आंकड़ों से देखने की है, जो आंकड़े पुलिस के कामों पर सवालिया निशान लगा रहे हैं.

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